ज्योतिष शास्त्र में मंगल को भूमि पुत्र कहा गया है। और इसे सेनापति माना गया है। मंगल गृह रक्तवर्णी, तेजस्वी, वीर, पराक्रमी, क्रूर साथ ही उद्धार भी माना जाता है। मंगल शाक्ति का प्रतीक है। इसका रंग लाल है। यह गृह अग्नि तत्व का है। इसे नैसर्गिक पाप गृह भी कहा जाता है। मंगल महान पराक्रमी रक्त कारक गृह है और अनावश्यक उग्रता तथा अवांछनीय शांति इसे अप्रिय है। मंगल का रत्न मूंगा होता है। जिसे धारण करने से यह थोडा शांत हो जाता है। यह मंगल गृह उच्च का हैतो जीवन में कर्ज न होगा और जातक भूमि-जायदाद का मालिक होगा। इसके विपरीत अगर मंगल नीच का होगा तो जातक के हिंसात्मक कार्यो में लिप्त होने की सम्भावनाये पाई जाती है। वह जातक सफल डॉक्टर नही होता है। यदि जनम कुंडली में यह लग्न, सप्तम भाव में बैठा हो तो दांपत्य सुख विवादग्रस्त हो जाता है। विवाह प्रकरणों में मंगल की विशेष भूमिका होती है। जिन जातको के प्रथम, सप्तम, अष्टम एवं द्वादश भाव में मंगल है तो ऐसे जातक को मांगलिक कहा जाता है एवं इनके रिश्ते उसी जातक से किये जाते है जो मांगलिक हो। जिन जातको को मांगलिक दोष होता है उनका भाग्योदय देरी से होता है। भाइयो से आपसी विचार, अचल सम्पति को लेकर लड़ाई, न्यायिक प्रक्रिया में उलझना, अग्नि प्रकोप आदि मांगलिक दोष के कारण ही होते है। अतः इन सभी प्रभावो को दूर करने एवं मांगलिक दोष के निवारण के लिए हमारे द्वारा मांगलिक दोष निवारण पूजन पैकेट उप्लब्ध करवाया जा रहा है जिसमे आप पाएंगे- 1. विवाह बाधा निवारण पूजन पैकेट/मंगल यन्त्र
2. मंगल यन्त्र पेंडेंट
3. मूंगे की माला
4. गौरी शंकर रुद्राक्ष
5. पारद शिवलिंग
6. सम्पूर्ण पूजन विधि
2. मंगल यन्त्र पेंडेंट
3. मूंगे की माला
4. गौरी शंकर रुद्राक्ष
5. पारद शिवलिंग
6. सम्पूर्ण पूजन विधि
